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Showing posts from December, 2023

सनातन का भक्ति भाव

एक हमारा धर्म है जहाँ ऋषि भृगु लेटे हुए भगवान को छाती पर लात मार देते हैं तो भगवान उनके पैर पकड़ लेते हैं कि आपके कोमल चरणों को मेरी कठोर छाती से चोट तो नहीं लगी, और उसे सहलाने लगते हैं। उन भृगु को न जलाया गया और न ही सिर काटा गया। एक धन्ना जाट भक्त हुए, उनको पुजारी जी ने बोला कि इस भगवान के विग्रह को भोग लगा कर ही खाना। वह डंडा लेकर खड़े हो गए कि खाओ वरना डंडे से पीटूँगा, भगवान चुपचाप विग्रह से निकल कर खाने लगे। उस धन्ना जाट का सिर नहीं काटा गया और न ही उसे जलाया गया। उसे भक्तमाल जैसे ग्रंथ में स्थान मिला और भगवान के भक्तों में सम्मिलित कर पूजा जाता है। भक्त रैदास जी, अपने चमड़ा धोने वाले कटोरे में गंगा जी को प्रकट कर दिया, लेकिन न उनको जलाया गया और न ही सिर काटा गया। सदना कसाई एक बहुत बड़े भक्त हुए हैं, वह शालिग्राम जो कि एक काला पत्थर होता है, जिसे हिन्दू साक्षात भगवान नारायण मान कर पूजते थे, उससे तराजू में माँस तौलते थे, बाट की जगह रखकर। लेकिन उन्हें न जलाया गया और न ही सिर काटा गया। बल्कि भक्तमाल जैसे प्रातः स्मरणीय ग्रंथ में स्थान देकर सदा के लिए आदरणीय बना दिया गया। चैतन्य महाप्रभु ...