Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2022

Ration Card Suspension

उत्तर प्रदेश में लगी BPL राशन कार्ड निरष्त करवाने के लिए लंबी कतारें। UP सरकार ने आदेश दिया कि जो व्यक्ति BPL राशन कार्ड के लिए पात्रता नही रखता है, वो 22 मई से पहले अपना BPL राशन कार्ड सरेंडर कर दे, नही तो अब तक जितना राशन लिया है उसकी वसूली की जाएगी। आज एक दिन में UP में 1लाख 88 हजार राशन कार्ड लोगों ने सरेंडर कर दिए। UP सरकार ने आज पूरे UP में मुनयादी करवा दी कि जिनके पास कार है, AC है, इनकम टैक्स दे रहा हो, जिनके पास 5 एकर से ज्यादा जमीन है,100 वर्ग मीटर का मकान हो, सरकारी नोकरी है, वे सब मुफ्त के राशन के पात्र नही है और 22 मई तक अपना BPL राशन कार्ड सरेंडर कर दे। आज UP ke हर शहर में कार्ड सरेंडर करने की लंबी लंबी लाइन लग गई।

VEDIC WISDOM OF THE DAY

Śrīmad-Bhāgavatam (Bhāgavata Purāṇa) » Canto 1: Creation » CHAPTER TWO ŚB 1.2.9 धर्मस्य ह्यापवर्ग्यस्य नार्थोऽर्थायोपकल्पते । नार्थस्य धर्मैकान्तस्य  कामो लाभाय हि स्मृत: ॥ dharmasya hy āpavargyasya nārtho ’rthāyopakalpate nārthasya dharmaikāntasya kāmo lābhāya hi smṛtaḥ Translation _All occupational engagements are certainly meant for ultimate liberation. They should never be performed for material gain. Furthermore, according to sages, one who is engaged in the ultimate occupational service should never use material gain to cultivate sense gratification._

ज्ञानवापी सर्वे में शिवलिंग से भी बड़ा सबूत मिला

इस सबूत के बाद मंदिर बनने से कोई रोक ही नहीं सकता -ज्ञानवापी सर्व के मामले में पूरी दुनिया की नजर वजूखाने में मिले शिवलिंग पर ही टिकी हुई है लेकिन सर्वे की जो रिपोर्ट कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह जी ने कोर्ट में सौंपी है उसमें शिवलिंग से भी बड़ा सबूत मिल गया है  -दरअसल ज्ञानवापी के ढांचे के ऊपर आप तीन गुंबद देखते हैं जो सफेद रंग के हैं क्योंकि आज तक कोई हिंदू मस्जिद के अंदर जा ही नहीं पाया था इसलिए वो देख ही नहीं पाया कि अंदर क्या है लेकिन 350 साल बाद जब हिंदू अंदर गए तो ज्ञानवापी मस्जिद का असली राज पूरी दुनिया के सामने आ गया -दरअसल जो सफेद गुंबद आप देख रहे हैं उसके नीचे आज भी पुराने मंदिर का शिखर मौजूद है यानी औरंगजेब के सिपेहसालारों ने ऊपर से ही मंदिर के शिखर को एक टोपी नुमा गुंबद से ढक दिया ।  -जब हिंदू पक्षकार ज्ञानवापी के अंदर गए तो उन्होंने ऊपर गुंबद की तरफ आंख उठाई तो उनको मंदिर का शिखर नजर आने लगा   -ज्ञानवापी के ढांचे पर जो 3 सफेद गुंबद हैं उसके ठीक नीचे आज भी मंदिर के तीन शिखर ज्यों के त्यौं मौजूद हैं.... कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह की सर्वे रिपोर्ट के पेज नंबर 4 ...

महाराणा प्रताप ने जीता था हल्दीघाटी का युद्ध

6 अकाट्य प्रमाण   - वामपंथी इतिहासकारों ने षड़यंत्र करके भारत की दस पीढ़ियों को झूठ पढ़ाया कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा हार गए थे... इन सभी वामपंथी इतिहासकारों को ढूंढ कर झूठ बोलने के इल्जाम में... देश को गुमराह करने के इल्जाम में फांसी पर लटकाना चाहिए क्योंकि इन्होंने देश के साथ धोखा किया ।     - महाराणा प्रताप ही हल्दीघाटी युद्ध के विजेता थे क्योंकि     पहली बात... किसी भी युद्ध की जीत और हार का फैसला इस बात से सुनिश्चित किया जाता है कि आखिर युद्ध के लक्ष्य किसके पूरे हुए ? जब अकबर ने युद्ध तय किया था तब मुगलों का लक्ष्य था किसी भी तरह जिंदा या मुर्दा महाराणा प्रताप को पकड़ना है । लेकिन मुगलों का ये लक्ष्य पूरा नहीं हुआ । जबकि महाराणा प्रताप का लक्ष्य था कि समूचे राजपुताना को ये संदेश देना है कि राजपुताना में अगर राजपूतों का कोई रक्षक और सर्वोच्च नेता है तो वो महाराणा प्रताप है । राणा प्रताप ये संदेश देना चाहते थे कि दिल्ली अपराजेय नहीं है और मुगलों को नेस्तनाबूत किया जा सकता है... इन दोनों लक्ष्यों को महाराणा प्रताप ने हासिल किया था ।   ...

मोदी कौन है?

साल 2000 का समय था केशुभाई पटेल गुजरात सरकार को ठीक से चला नहीं पा रहे थे, लोगों में और पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा था। इसी बीच जनवरी 2001 में गुजरात में अब तक का सबसे भीषण भूकंप आया और लगभग 20 हज़ार लोगों को अपने प्राण गँवाने पड़े, गुजरात घोर निराशा में डूबा हुआ था।   तब स्व. अटलबिहारी वाजपेयी जी ने एक अनजाने, गुमनाम से आदमी को संगठन से निकालकर गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया, ये अक्टूबर 2001 की बात है। लेकिन उस आदमी ने हिम्मत नहीं हारी उसने गुजरात को फिर से बनाने में दिन रात एक कर दिया इसके बाद गोधरा कांड हुआ और उसकी परिणीति में गुजरात मे भीषण दंगे हुए, इन दंगों में 1000 से ज़्यादा लोग मारे गए और जान माल का नुकसान हुआ। इसे लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा मचाया। कुछ सांसदों, तथाकथित बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, फिल्मकारों ने बाक़ायदा अमेरिका को चिठ्ठी लिखी कि इस व्यक्ति को अमेरिका में ना आने दिया जाए। देखते ही देखते 2002 के चुनाव आ गए और गुजरात की जनता ने इस आदमी पर भरोसा करते हुए फिर से गुजरात की बागडोर संभालने को दे दी। इन्हीं दंगों में उसने वो कर दिखाया कि वो देश के ...