6 अकाट्य प्रमाण
- वामपंथी इतिहासकारों ने षड़यंत्र करके भारत की दस पीढ़ियों को झूठ पढ़ाया कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा हार गए थे... इन सभी वामपंथी इतिहासकारों को ढूंढ कर झूठ बोलने के इल्जाम में... देश को गुमराह करने के इल्जाम में फांसी पर लटकाना चाहिए क्योंकि इन्होंने देश के साथ धोखा किया ।
- महाराणा प्रताप ही हल्दीघाटी युद्ध के विजेता थे क्योंकि
पहली बात... किसी भी युद्ध की जीत और हार का फैसला इस बात से सुनिश्चित किया जाता है कि आखिर युद्ध के लक्ष्य किसके पूरे हुए ? जब अकबर ने युद्ध तय किया था तब मुगलों का लक्ष्य था किसी भी तरह जिंदा या मुर्दा महाराणा प्रताप को पकड़ना है । लेकिन मुगलों का ये लक्ष्य पूरा नहीं हुआ । जबकि महाराणा प्रताप का लक्ष्य था कि समूचे राजपुताना को ये संदेश देना है कि राजपुताना में अगर राजपूतों का कोई रक्षक और सर्वोच्च नेता है तो वो महाराणा प्रताप है । राणा प्रताप ये संदेश देना चाहते थे कि दिल्ली अपराजेय नहीं है और मुगलों को नेस्तनाबूत किया जा सकता है... इन दोनों लक्ष्यों को महाराणा प्रताप ने हासिल किया था ।
दूसरी बात... महाराणा और मुगल सेना का एक /तीन का अनुपात था... यानी महाराणा के एक सैनिक के मुकाबले के लिए मुगलों के पास तीन सैनिक थे । ऐसे में महाराणा प्रताप पहले ही ये बात जानते थे कि बड़ी संख्या में मौजूद शत्रुओं को गोरिल्ला वार से ही हराया जा सकता है इसलिए हल्दीघाटी युद्ध के पहले ही ये रणनीति बना ली गई थी कि मुगल सेना को भारी नुकसान पहुंचाकर महाराणा की सेना वापस अपने सुरक्षित ठिकानों में लौट आएगी । इसलिए भी अगर देखा जाए तो महाराणा का लक्ष्य पूरा हुआ क्योंकि भारी मात्रा में मुगल सैनिकों को नुकसान पहुंचाकर राणा प्रताप सुरक्षित लौट आए थे ।
तीसरी बात... युद्ध की आखिरी पलों में जब राणा प्रताप ने मान सिंह के बेहद करीब जाकर उस पर वार किया था... तब राणा प्रताप पर डेढ सौ मुगल सैनिक टूट पड़े थे... उस वक्त राणा प्रताप को सुरक्षित निकालने का काम झाला मान सिंह और राम शाह तंवर ने किया था... अकबर तो कभी युद्ध के मैदान में जाता ही नहीं था... राणा प्रताप राजा होने के बाद भी युद्ध के मैदान में गए थे... और लड़े थे... और जब वो डेढ़ मुगल सैनिकों के द्वारा घेर लिए गए... तब उनका बच निकलना आवश्यक था क्योंकि राजा का जीवित रहना जरूरी होता है... इसे पलायन नहीं कहा जा सकता है... इस आधार पर तो कायर अकबर को हमेशा पलायित ही कहना चाहिए क्योंकि वो कभी युद्धभूमि में जाता ही नहीं था... एक दो युद्धों में गया भी तो सिर्फ दिखावे के लिए गया । सबसे बड़ी बात ये है कि झाला मान सिंह और राम शाह तंवर ने उन डेढ सौ मुगल सैनिकों को इंगेज किया हुआ था और उनसे जमकर लड़ाई लड़ी थी । इसलिए सिर्फ उस घटना से हार की बात कहना ठीक नहीं है ।
चौथी बात... अगर मुगल युद्ध जीत गए थे तो उन्होंने 100 मीटर तक भी राणा प्रताप का पीछा क्यों नहीं किया ?
पांचवीं बात... एक हफ्ते बाद जब राणा की तलाश में मुगल सैनिक उनके पीछे गए तो इस तलाश के अभियान में ही 3 दिनों के अंदर 900 मुगल सैनिक मर गए... इस तरह से देखें तो ये मुगलों की भारी पराजय थी... आगे के लेखों में पूरा युद्ध विस्तार से बताएंगे ।
छठवीं बात... हल्दीघाटी के युद्ध के बाद भी महाराणा प्रताप अपने सरदारों को जागीरें बांटते रहे... जागीरें बांटने के ताम्रपत्र भी अब मिल गए हैं... ऐसे 6 से ज्यादा ताम्रपत्र मिले हैं तो अब सवाल ये है कि हारा हुआ राजा जागीर कैसे बांट सकता है ? ये सबसे बड़ा प्रमाण है कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा विजयी हुए थे ।
- सवाल उठता है कि फिर आखिर क्यों राणा प्रताप को हारा हुआ साबित करने के प्रयास में वामपंथियों ने अपनी कलम तोड़ दी । इसलिए क्योंकि वो हमेशा हिंदुओं का मनोबल कमजोर करना चाहते थे और इसमें वो काफी हद तक सफल भी हुए हैं । इसीलिए वामपंथियों के इस गलत नैरेटिव को खत्म करने के लिए सही नैरेटिव वाले इस लेख को सारे ग्रुप्स में भेज दीजिए धन्यवाद
हर हर महादेव
जय राजपुताना
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